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Very cute and best Emotional Story in Hindi of a mother

सुगंगा देवी का ढाई साल का बेटा था।उनके बेटे का नाम सुविर था।सुविर बहुत ही सुंदर और नटखट लड़का था।सुविर हर दम कुछ न कुछ नटखटपना करता रहता था।Emotional story in hindi वह हमेशा दौड़ कर ही चलता था। अक्सर दौड़ कर चलने कि वजह से वह गिर जाता था।

Best Emotional Story Of a Mother

Best Emotional Story Of a Mother

सुगंगा देवी उसे दौड़ने से मना भी करती थी,लेकिन वह नहीं मानता था।सारा समय वह अपने घर मे उछल-कूद करता रहता था।सुगंगा देवी जब कभी उसे डांटती या आँखे दिखलाती,तो तुरंत ही सुविर की आँखो मे आँशु भर आते थे।उस समय सुविर तुतलाते हुए कहता,”तू भी माँ”।

यह सुनकर सुगंगा देवी अपने बेटे को अपने सिने से लगा लेती थी।सुगंगा देवी के घर के आस-पास बहुत सारी गिलहरिया थी।ये गिलहरिया उनके घर के बगीचे और छत पर हमेशा दौड़ा करती थी। सुविर को ऊन गिलहरियों से बहुत लगाव था।

गिलहरिया जिधर भी जाती,सुविर भी उनके पीछे दौड़ पड़ता था।वह गिलहरियो को पकड़ने की कोशिस करता था।लेकिन जब वह गिलहरियों को नहीं पकड़ पता,तो वह थोड़ा उदास हो जाता था।सुगंगा देवी, तब गिलहरियो को पास बुलाने के लिए मूँगफलिया देती। गिलहरियो को अपने आस-पास देख कर सुविर को बहुत मजा आता था।सुगंगा देवी के पति का नाम त्रिवेणी लाला था।

त्रिवेणी जी भी सुविर को बहुत प्यार करते थे। जब भी कभी सुविर को उसकी माँ डाँट देती थी,तो वह अपने पिता के पास आ जाता था।अपने पिता को वह अपनी माँ के ‘डाँट’ के बारे मे बताता था और जिद करता कि उसके पिता भी उसकी माँ को डाँट लगाए। अपने पिता को वह हाथी बनने के लिए कहता..।जब सुविर के पिता हाथी राजा बन जाते,तब वह उनके कंधे पर बैठ कर हाथी राज्य की सवारी करता था। दोनों पति-पत्नी सर दिन अपने बेटे मे ही व्यस्त रहते थे। एक दिन सुगंगा देवी ने अपने पति से उसके मायके छोड़ने को कहा..।

त्रिवेणी लाल जी कपड़ों के कारोबारी थे।अपने कारोबार मे वह हमेश व्यस्त रहते थे।इसीलिए उन्होंने अपनी पत्नी से खुद ही मायके चले जाने को कह दिया। त्रिवेणी जी ने अपनी पत्नी के मायके जाने के लिए ट्रेन का टिकट करवा दिया ।जिस रेलवे स्टेशन से सुगंगा मायके के लिए ट्रेन पकड़ने वाली थी।वह रेलवे स्टेशन उनके घर से पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर था। सुगंगा देवी अपने बेटे को लेकर स्टेशन की ओर निकाल पड़ती है।आधे घंटे मे सुगंगा देवी जी अपने बेटे के साथ स्टेशन पहुँच जाती है। दोनों माँ-बेटे स्टेशन के एक प्लेटफॉर्म पर जाकर बैठ जाते है।ट्रेन के आने मे अभी दस मिनट का समय था।

रेलवे प्लेटफॉर्म मे भी बहुत सारी गिलहरिया थी।सुविर ऊन गिलहरियो के पीछे भाग रहा था। सुगंगा देवी अपने बेटे के पीछे-पीछे चल रही थी।ट्रेन के आने मे कुछ ही समय बाकी था।एकाएक सुगंगा देवी को चक्कर आ जाता है और वह गिर पड़ती है।सुविर गिलहरियो को देखने मे मस्त था।वह गिलहरियों के पीछे-पीछे रेलवे प्लेटफॉर्म से दूर निकल गया। सुविर लगभग बीस मिनट तक गिलहरियो के पीछे भागता रहा।ढाई साल का सुविर अब थक चुका था।उसने अपने चारो ओर देखा,लेकिन रेलवे ट्रैक और जंगल के सिवा उसे कुछ भी नजर नहीं आया।

सुविर जोर-जोर से रोने लगा।बार-बार सुविर माँ..माँ पुकार रहा था।सुविर इधर-उधर चलने लगा और अपनी माँ को ढूँढने लगा।परंतु जब उसकी माँ उसे कही भी नजर नहीं आई। तब वह चिल्ला-चिल्ला कर रोने लगा।इधर सुगंगा जब रेलवे प्लेटफॉर्म पर बेहोश हुई,उसी समय ट्रेन भी आ गई। उस प्लेटफॉर्म पर मौजूद लगभग सारे यात्री ट्रेन मे बैठ कर चले गए। लेकिन उस प्लेटफॉर्म पर ट्रेन जाने के बाद भी खड़े थे।

उन्ही लोगो ने सुगंगा को उठाया और अस्पताल ले गए।जब अस्पताल मे सुगंगा को होश आया,तो उसने अपने बेटे के बारे मे लोगों से पूछा?लेकिन लोगो ने यही जवाब दिया कि रेलवे प्लेटफॉर्म पर वो अकेली थी। सुगंगा की आँखो से बड़े-बड़े आँशु गिरने लगे।वह जोर-जोर से रोने लगी।थोड़ी देर बाद त्रिवेणी लाल भी अस्पताल पहुँच गए।

सुगंगा के त्रिवेणी जी को भी सुविर के खो जाने के बारे मे बताया।त्रिवेणी जी भी यह सुनकर बहुत व्याकुल हो गए।त्रिवेणी जी खुद को कोसने लगे और फुट-फुट कर रोने लगे।

त्रिवेणी जी अपनी पत्नी सुगंगा को अपने घर ले आए।इसके बाद त्रिवेणी जी अपने बेटे के लापता होने की रिपोर्ट पुलिश को देने चले गए। सुगंगा उस समय घर मे अकेली थी। वह एक कमरे मे चली गई और वहाँ जाकर बैठ गई।उस कमरे मे एक ओर सुविर के कुछ कपड़े पड़े थे।अचानक से सुगंगा की नजर सुविर के कपड़ो पर पड़ी। वह दौड़ कर सुविर के कपड़ो को अपने हाथो मे उठा लेती है।सुगंगा अपने बेटे सुविर के कपड़ो को सिने से लगा कर दहाड़ मार-मार कर रोने लगती है।

दूसरी ओर जब सुविर रेलवे प्लेटफॉर्म के पास जब अपनी माँ को ढूंढ रहा था। उसी समय एक रेलवे कर्मी की नजर उस पर पड़ती है।उस रेलवे कर्मी का नाम विनोद था।सुविर को रोता देख कर वह विनोद उसके पास आ जाता है।

वह सुविर को अपने गोद मे ले लेता है।विनोद सुविर से उसके माता-पिता के बारे मे पूछता है? लेकिन सुविर केवल रोए जा रहा था। सुविर के मुह से केवल ‘माँ’ शब्द हि निकल रहा था। उस छोटे से बच्चे के मुख से माँ शब्द सुनकर विनोद का भी हृदय फट गया।सुविर को देख कर विनोद की भी आँखों से आँशु बहने लगे।नन्हा सुविर अभी ढाई साल का था और ठीक से बोल भी नहीं पता था। सुविर को गोद मे लेकर विनोद रेलवे प्लेटफॉर्म पर आ गए। विनोद ने प्लेटफॉर्म पर कुछ चॉकलेट खरीदे और सुविर को दिया।

लेकिन सुविर ने कुछ भी नहीं लिया।उसी समय एक गिलहरी सुविर के पास से गुजरी। सुविर रोते हुए बोला,”माँ गिलहरी मूंगफली देती है।मेरा घर मे गिलहरी। ”विनोद ने सुविर से कहा कि तुम्हारी माँ गिलहरी को मूंगफली देती है।सुविर ने अपना सर को हिला दिया। इधर त्रिवेणी जी पुलिश थाने मे रिपोर्ट करने के बाद अपने घर आ जाते है।सुगंगा ने त्रिवेणी जी कहा,मै एक बार स्टेशन जाना चाहती हूँ।

त्रिवेणी जी अपनी पत्नी को लेकर स्टेशन की ओर निकल पड़ते है। स्टेशन पहुँच कर दौड़ कर सुगंगा रेलवे प्लेटफॉर्म पर पहुँच जाती है।सुगंगा प्लेटफॉर्म मी इधर-उधर देखने लगती है।सुविर ने अपनी माँ को उसी समय देख लिया। सुगंगा को पुकारता हुआ,सुविर अपने नन्हे कदमो से दौड़ने लगा।सुगंगा भी सुविर की ओर दौड़ने लगी।सुविर अपने माँ के पास पहुँचा और उससे लिपट गया।सुगंगा अपने बेटे को अपने बाहो मे भर लेती है। त्रिवेणी जी भी भागते हुए आते है और अपने बेटे को अपनी छाती से लगा लेते है। 
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