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Rochak Kahani in Hindi | बेस्ट रोचक कहानी इन हिंदी | लोग बदलते है

कई बार लोग केवल गलत व्यवहार करते है।बहुत से लोग तो सिर्फ हमारा बुरा ही करते है। Rochak kahani in hindi मे सकिता नाम की औरत की कहानी आप पढ़ेंगे। जीसने अपने लोगों ने काफी परेशान किया। लेकिन इस woman ने सबकुछ सहते हुए अपने घर के लोगो से बदला नहीं लिया।बल्कि,सकिता ने मुश्किल वक्त मे उनकी मदत की।आइए इस बेस्ट रोचक कहानी इन हिन्दी को शुरू करते है।

Rochak Kahani in Hindi

Rochak Kahani in Hindi

सकिता का marriage अनुज नाम के एक व्यक्ति से हुआ था। उसकी नई-नई शादी हुई थी ससुराल मे सकिता के दो दिन बित चुके थे।  अनुज के तीन बड़े भाई और एक छोटा भाई भी था। उसके तीनो बड़े भाइयो का भी विवाह हो चुका था। लेकिन अनुज के छोटे भाई की अभी शादी नहीं हुई थी।

अनुज के माता-पिता बहुत ही बूढ़े थे..। सकिता के ससुराल मे हर कोई उसे बहुत ही respect और love दे रहा था। अपने ससुराल मे सकिता बहुत ही खुस थी. अनुज और उसके भाई कुम्हार थे। वे लोग मिट्टी का बर्तन बनाने का काम करते थे। अनुज और उसके भाई रोज मिट्टी के बर्तन बनाते थे और बेचते थे। लेकिन अनुज को मिट्टी का बर्तन बनाना नहीं आता था।

वह केवल मिट्टी मे पानी डाल कर उसे गीला करने का काम करता था। उनका घर इसी व्यवसाय के द्वारा चलता था। shikshaprad new story अनुज का घर भी मिट्टीयो का बना था। उसके मिट्टियो के घर मे कुल मिला कर छह कमरे थे। हर दो महीने मे मिट्टी के घर मे मिट्टियो का लेप चढ़ाया जाता था। मिट्टी का लेप चढ़ना एक मुस्किल काम था। रोचक कहानी इन हिंदी इसके लिए सबसे पहले मिट्टी लाई जाती थी। फिर मिट्टी मे पानि डाल कर उसे गीला किया जाता था और मिट्टी का लेप तैयार किया जाता था। सारे घर मे मिट्टी का लेप चढाने मे तीन दिन का समय लगता था।

ससुराल मे सकिता का तीसरा दिन था। उसकी तीनों जेठानिया घर पर मिट्टी का लेप चढ़ाने के लिए मिट्टी लाने जाने लगी। सकिता ने अपनी जेठानियो को कहा कि वह भी उनके साथ मिट्टी लाने जाना चाहती है। तीनो जेठानिया सकिता को अपने साथ लेकर मिट्टी लाने जाने लगी। उनके घर से नजदीक ही एक स्थान पर सारी जेठानिया रुक गई। उस जगह पर ढेर सारी पीले रंग की मिट्टी थी।

सकिता की बड़ी जेठानी बहुत ही लंबी-चौड़ी थी। वह एक बाद सा कुदारी लेकर मिट्टियो को कोड़ने लगी। बाकी जेठानिया मिट्टी को इक्कठा कर एक बोर मे डालने लगी। वे लोग मिट्टी लाने के लिए तीन बोरिया लेकर गए थे। सकिता की बड़ी जेठानी मिट्टी कोड़ते-कोड़ते थक चुकी थी। वह रीलैक्स करने के लिए जमीन पर बैठ गई।

अक्सर मिट्टी को कुदारी से कोड़ने का काम बड़ी जेठानी ही करती थी। क्यूंकि मिट्टी को कोड़ने मे बहुत अधिक बल लगता था। बड़ी जेठानी काफी स्ट्रॉंग थी। Navin gatha बड़ी जेठानी का पूरा शरीर पसीने से भिंग चुका था। सकिता की बड़ी जेठानी की उम्र भी थोड़ी अधिक हो चली थी। अन्य दोनो जेठानिया मिट्टी को कोड़ने का काम नहीं करती थी। सकिता ने अपनी जेठानियो से कहा कि वह मिट्टी कोड़ना चाहती है।

उसकी जेठानियों ने उसे मना किया। वे लोग कहने लगी कि मिट्टी को कुदारी से कोड़ना काफी मुस्किल है। सकिता ने जेठानियों से कहा,मै आसानी से मिट्टी को कोड़ सकती हूँ। उसकी जेठानिया भी उसकी बात मान ली। सकिता ने कुदारी उठाया और मिट्टी कोड़ने लगी। वह जोर-जोर से कुदारी चलाने लगी। थोड़े ही समय मे उसने बहुत सर मिट्टी कोड़ दिया। सकिता की बड़ी जेठानी सकिता से बहुत प्रसन्न हुई।

सारी जेठानिया मिट्टी को बोरियो मे भरने लगी। सभी बोरियो को मिट्टियों से भर कर वे लोग घर आ गए। सकिता काफी थक चुकी थी।उसे बहुत जोरों की Hunger लगी थी। बड़ी जेठानी से उसने खाना देने को कहा..। सकिता की बड़ी जेठानी बोली,”थोड़ी देर रुको।पहले घर के सारे मर्दों को खिला लेती हूँ,फिर हमलोग खाएंगे।” अनुज और उसके सारे भाई कहना खाने के लिए बैठ जाते है। घर के सारे मर्दों को भोजन परोसा जाता है। सारे मर्द पेट भर के भोजन करते है,फिर अपने काम मे लग जाते है।

अब घर कि सारी औरतो के लिए भोजन निकाला जाता है। तीनो जेठानियो ने अपनी थाली मे ढेर सारा भोजन निकाल लिया। Ache wichar ki katha सकिता की थाली मे बस थोड़ा सा दाल-चावल डाल दिया। काफी भूखी होने कि वजह से सकिता ने तुरंत ही दाल-चावल खा कर खत्म कर दिया।

बड़ी जेठानी से सकिता ने और भी डाल-चावल की मांग कि। लेकिन बड़ी जेठानियो ने उससे कहा कि सर खाना खत्म हो चुका है। New rochak kahani in hindi सकिता ने बहुत कम दाल-चावल खाए थे। वह अभी भी भूखी थी।अपनी भूख को शांत करने के लिए सकिता ने एक लोटा भर के Water पी लिया।

इसके अगले दिन सारी जेठानिया घर पर मिट्टी का लेप चढ़ाने के काम मे लग गई। सकिता इस काम मे बिल्कुल नई थी।उसे घर को मिट्टी से लेपना नहीं आता था। उसकी जेठानियो ने उसे पानी भर कर लाने का काम दिया। उनके घर के बाहर एक बाद सा कुआ था। एक बड़ी सी बाल्टी लेकर सकिता Well मे से जल भरने लगी। रोंचक कहानी इन हिंदी दरअसल मिट्टी बहुत ही अधिक थी।

सारी मिट्टियो को गीला करने मे ढेर सारे पानी की जरूरत थी। सकिता बाल्टी मे भर-भर के पानी लाने लगी और मिट्टी को गीला करने लगी। वह कुआ से पानी भरते-भरते थक चुकी थी।वह कुआ के पास ही बैठ गई। इतने मे उसकी एक जेठानी उसके पास आ गई। जेठानी ने उसे कहा कि अभी और भी पानी कि जरूरत है। सकिता उठ गई।वह फिर से कुआ से पानी भरने लगी। Rochak kahani hindi mein बाल्टी मे पानी भर-भर के वह लाती गई। चार घंटे तक कुआ से पानी भर्ती रही। तभी उसकी बड़ी जेठानी ने उसे रुक जाने के लिए कहा..।

आज सकिता कल से भी अधिक थक गई थी। Sunder gyan अगले दिन की तरह उसकी सारी जेठानियो ने अपने लिए भोजन पहले निकाल लिया। लेकीन आज कल से कम food उसकी थाली मे था। उस थोड़े से भोजन को खा कर सकिता उठ गई। फिर से उसने water पीकर अपना पेट भरा। हर दिन सकिता को खाने के लिए थोड़ा सा ही भोजन मिलता था। एक दिन अनुज ने अपनी भाभियो की यह करतूत देख ली।

अनुज ने अपनी भाभियो को ऐसा करने से मना किया। उसकी सारी भाभिया बोली,”मिट्टी का बर्तन हमारे husband बनाते है,तुम नहीं।” इसके बाद अनुज ने अपने बड़े भाइयों को भी यह बात बताई। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। एक दिन अनुज ने अपनी भाभियों से request किया..!

”आप लोग मुझे कम भोजन दो,लेकिन मेरी wife को भर पेट खाना दो।” परंतु उसकी भाभिया नहीं मानी। सुबह के समय एक दिन अनुज अपनी पत्नी को लेकर अपने घर से निकल गया। अनुज ने एक किराये का घर ले लिया और मजदूरी का काम करने लगा। धिरे-धिरे अनुज ने पैसे ईकट्ठे किये और एक छोटा सा होटल खोल लिया।

जल्द ही अनुज अपने Hotel से अच्छे-खासे पैसे कमाने लगा। उसने बहुत सारी गाये भी खरीद ली और दूध भी बेचने लगा। साथ ही एक बड़ा फार्म हाउस भी उसने बना लिया। सकिता भी फार्म हाउस मे खूब मेहनत करती थी। जल्द ही अनुज और सकता Rich बन गए। अनुज के बड़े भाइयो का मिट्टी के बर्तन का व्यवसाय बहुत कम हो गया था। बड़े भाइयों के परिवार को खाने-पीने की भी दिक्कत होने लगी।

जब सकिता को ऊनलोगों के बारे मे पता चला। रोचक कहानी इन हिन्दी तब वह अपनी जेठानियो के घर चली गई। सकिता की जेठानियो की स्थिति बड़ी ही दयनीय थी। दो दिनों से ऊनलोगों ने कुछ भी नहीं खाया था। 

सकिता ने बड़े प्यार से अपनी जेठनियों से बाते की। सारे लोगों को सकिता अपने घर ले आई। पहले सबको सकिता ने भोजन कराया। सबकी खूब खातिरदारी भी की। सारी जेठानिया अपने किए पर बहुत ही लज्जित थी..! अनुज ने भी अपने सारे भाइयों की बहुत सेवा की। सारे भाई हाथ जोड़ कर अनुज से माफी मांगने लगे। अनुज ने उन्हे ऐसा करने से मना किया। अनुज और सकिता के मन मे ऊनलोगों के प्रति तनिक भी Anger नहीं था।

महत्वपूर्ण शिक्षा:-

यदि लोगों से जाने -अनजाने मे कोई mistake हो जाए।तो भी हमे उनसे नाराज नहीं होना चाहिए। दूसरों को  punishment देने से हम कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। Forgivness हमेसा  पुनिशमेंट से बड़ी होती  है। इसलिए जिसने भी हमारे साथ बुरा या गलत किया है  हमे उन्हे भी  माफ या क्षमा कर देना चाहिए।

मित्रों,आपको यह Rochak Kahani in hindi कैसी लगी?इस नई और बेस्ट रोचक कहानी इन हिन्दी पर हमे अपने विचार या मत कमेन्ट के द्वारा बताए।

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